गोयल: सरकार एमएसएमई निर्यातकों की EU CBAM और वनों की कटाई नियमों की सर्टिफिकेशन लागत उठाएगी
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन के तहत सरकार एमएसएमई निर्यातकों की सर्टिफिकेशन लागत उठाएगी, जिसमें EU CBAM और वनों की कटाई के नियम शामिल हैं। यह एक टिप्पणी है, अधिसूचित योजना नहीं, और क्लेम की प्रक्रिया घोषित नहीं हुई है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) के तहत एमएसएमई निर्यातकों की सर्टिफिकेशन लागत का भुगतान करेगी, जिसमें यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर टैक्स और उसके वनों की कटाई संबंधी नियमों से जुड़ी लागत भी शामिल है। उन्होंने यह बात 22 October को बर्लिन में कही।
सबसे पहले एक बात साफ़ समझ लें: यह मंत्री की टिप्पणी है, जैसा Moneycontrol ने रिपोर्ट किया है। यह अधिसूचित (notified) योजना नहीं है। रिपोर्ट में दिशानिर्देश, आवेदन प्रक्रिया, बजट या पोर्टल का कोई ज़िक्र नहीं है, इसलिए अभी आवेदन करने के लिए कुछ उपलब्ध नहीं है।
मंत्री ने क्या कहा
गोयल ने कहा कि सरकार EPM के तहत, किसी भी उत्पाद और किसी भी क्षेत्र के लिए, एमएसएमई निर्यातकों की सर्टिफिकेशन की पूरी लागत का समर्थन करने को तैयार है। इसमें EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM) और वनों की कटाई संबंधी नियमों से जुड़ी लागत शामिल है। अन्य सर्टिफिकेशन लागतों के लिए उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें graded यानी चरणबद्ध तरीके से संभालेगी।
रिपोर्ट इसे छोटे कारोबारों को यूरोपीय बाज़ार की बदलती व्यापार ज़रूरतों का पालन करने में मदद के प्रयास के रूप में पेश करती है। वहाँ जलवायु और पर्यावरण नियम बाज़ार तक पहुँच की लागत बढ़ा सकते हैं, खासकर उन कारोबारों के लिए जिनके पास उत्सर्जन मापने, सप्लाई चेन का पता लगाने और ज़रूरी सर्टिफिकेशन लेने के सीमित संसाधन हैं।
निर्यातकों के लिए ये दोनों EU नियम क्यों मायने रखते हैं
CBAM। यह व्यवस्था 1 January 2026 को अपने निर्णायक (definitive) चरण में पहुँची। यह कुछ अधिक उत्सर्जन वाले सामान के आयात पर कार्बन लागत लगाती है, ताकि उनके साथ वैसा ही व्यवहार हो जैसा EU के भीतर बने उत्पादों के साथ होता है। फ़िलहाल यह सीमेंट, लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन को कवर करती है।
CBAM की ज़िम्मेदारियाँ निभाने का दायित्व EU के आयातकों पर है, जिसमें कवर किए गए उत्सर्जन के लिए सर्टिफिकेट खरीदना भी शामिल है। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार नियम विदेशी आपूर्तिकर्ताओं तक भी पहुँच सकते हैं, जैसे उत्सर्जन डेटा की माँग, सत्यापन और सोर्सिंग लागत में संभावित बदलाव के रूप में।
वनों की कटाई संबंधी नियम। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि EU में बिकने वाले उत्पाद ऐसी ज़मीन से न आएँ जहाँ हाल में वनों की कटाई या वन क्षरण हुआ हो। यह मवेशी, कोको, कॉफ़ी, पाम ऑयल, रबर, सोया और लकड़ी के साथ-साथ उनसे बने तय उत्पादों को कवर करता है। कारोबारों को यह साबित करना होगा कि उनका सामान कहाँ से आया है और ट्रेसेबिलिटी तथा ड्यू डिलिजेंस की शर्तें पूरी करनी होंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक यह नियम बड़े और मध्यम आकार के ऑपरेटरों के लिए 30 December से और अधिकांश सूक्ष्म और छोटे ऑपरेटरों के लिए 30 June 2027 से लागू होता है। रिपोर्ट पहली तारीख का साल नहीं बताती।
अभी क्या घोषित नहीं हुआ है
रिपोर्ट में कई सवाल खुले हैं। सरकार के और बताने तक इन्हें अज्ञात मानें:
- EPM के तहत कोई एमएसएमई निर्यातक यह सहायता कैसे क्लेम करेगा, और क्या कोई फ़ॉर्म या पोर्टल होगा।
- कौन-से सर्टिफिकेशन गिने जाएँगे, और क्या सहायता में टेस्टिंग, सत्यापन या सलाहकारों की फ़ीस शामिल है। मंत्री ने सामान्य रूप से सर्टिफिकेशन लागत की बात की।
- CBAM और वनों की कटाई के बाहर की लागतों के लिए graded तरीके का मतलब क्या है।
- क्या आपके द्वारा पहले से चुकाई गई लागत कवर होगी।
- सहायता कब शुरू होगी, और कितनी राशि अलग रखी गई है।
FTA पर टिप्पणी
गोयल ने प्रस्तावित भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साल के अंत तक हस्ताक्षरित हो जाएगा और March या April 2027 तक लागू हो जाएगा। यह उनकी उम्मीद है, पक्की तारीख नहीं।
आपके लिए इसका मतलब
अगर आप EU को निर्यात करने वाले एमएसएमई हैं, या ऐसे व्यवसाय को सप्लाई करते हैं जो निर्यात करता है:
- देखें कि आपका उत्पाद कवर है या नहीं। अगर आप सीमेंट, लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक, बिजली या हाइड्रोजन सप्लाई करते हैं, तो CBAM प्रासंगिक है। अगर आप मवेशी, कोको, कॉफ़ी, पाम ऑयल, रबर, सोया, लकड़ी या उनसे बने उत्पादों का काम करते हैं, तो वनों की कटाई का नियम प्रासंगिक है।
- अपने EU खरीदार से पूछें कि उन्हें आपसे क्या चाहिए। उत्सर्जन डेटा और सामान कहाँ से आया इसका प्रमाण उसी तरह की जानकारी है जो रिपोर्ट के अनुसार खरीदार माँग सकते हैं।
- अभी से रिकॉर्ड रखना शुरू करें। उत्सर्जन माप, आपूर्तिकर्ताओं का विवरण और उत्पत्ति के रिकॉर्ड फंडिंग जैसी भी हो, ज़रूरी होंगे।
- अभी भरपाई मानकर न चलें। यह मानकर बड़ा सर्टिफिकेशन अनुबंध न करें कि सरकार पैसे लौटा देगी। कुछ भी अधिसूचित नहीं हुआ है।
- आधिकारिक घोषणा पर नज़र रखें। EPM के तहत सहायता की औपचारिक घोषणा होते ही विवरण के लिए सरकार की आधिकारिक घोषणाएँ देखें।
स्रोत: पीयूष गोयल की बर्लिन में की गई टिप्पणियों पर Moneycontrol की रिपोर्ट।
कवर फ़ोटो: Zoshua Colah, Unsplash से