75 करोड़ का सपोर्ट मिला है, और 1,200+ वूमेन-लेड स्टार्टअप्स फंडेड हुए हैं। SISFS कैसे काम करता है? फंड्स गवर्नमेंट द्वारा डायरेक्टली डिस्बर्स नहीं किए जाते। DPIIT अप्रूव्ड इन्क्यूबेटर्स को कैपिटल ऐलोकेट करता है — जो फिर ऐप्लिकेशन्स इवैल्यूएट करते हैं और सिलेक्टेड स्टार्टअप्स को फंड्स रिलीज़ करते हैं। एक Experts Advisory Committee (EAC) इन्क्यूबेटर सिलेक्शन और स्कीम इम्प्लिमेंटेशन को ओवरसी करती है। हर इन्क्यूबेटर एक Incubator Seed Management Committee (ISMC) कन्स्टीट्यूट करता है — जिसमें डोमेन एक्सपर्ट्स, VC और ऐंजल इन्वेस्टर रिप्रेज़ेंटेटिव्स, स्टेट गवर्नमेंट नॉमिनीज़, और एक्सपीरिएंस्ड एंटरप्रेन्योर्स शामिल होते हैं — फंडिंग के लिए स्टार्टअप्स को इवैल्यूएट और सिलेक्ट करने के लिए। एक स्टार्टअप कितनी फंडिंग ले सकता है? | Support Type | Amount | Purpose | |---|---|---| | Grant | ₹20 लाख तक | Proof of concept, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, प्रोडक्ट ट्रायल्स | | Debt / Convertible Debentures | ₹50 लाख तक | मार्केट एंट्री, कमर्शियलाइज़ेशन, स्केलिंग | ग्रांट फंड्स माइलस्टोन-बेस्ड ट्रांचेज़ में रिलीज़ किए जाते हैं। डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर इंटरेस्ट प्रिवेलिंग RBI repo rate से ज़्यादा नहीं होता, टेन्योर 5 साल तक, और मोरेटोरियम 12 महीने तक होता है। लोन्स अनसिक्योर्ड हैं — कोई कोलैटरल या पर्सनल गारंटी रिक्वायर्ड नहीं। फंड्स डायरेक्टली स्टार्टअप के बैंक अकाउंट में जाते हैं। एक स्टार्टअप ग्रांट और डेट सपोर्ट दोनों ले सकता है — स्कीम के तहत हर एक एक बार। कौन अप्लाई करे? SISFS आइडिया या MVP स्टेज पर टेक-ड्रिवन स्टार्टअप्स के लिए है — जो DPIIT-रिकग्नाइज़्ड हैं और ऐप्लिकेशन के समय 2 साल से कम पुराने हैं। स्कीम सेक्टर-एग्नॉस्टिक है, पर इन्क्यूबेटर्स हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, बायोटेक, सोशल इम्पैक्ट, क्लीन एनर्जी, वेस्ट मैनेजमेंट, वॉटर मैनेजमेंट, फाइनैंशियल इन्क्लूज़न, एजुकेशन, मोबिलिटी, डिफेंस, और स्पेस के स्टार्टअप्स को प्रेफरेंस देते हैं। रिक्वायर्ड डॉक्यूमेंट्स DPIIT रिकग्निशन सर्टिफिकेट Certificate of incorporation फाउंडर्स के PAN कार्ड और Aadhaar शेयरहोल्डिंग पैटर्न / cap table — ≥51% इंडियन प्रमोटर होल्डिंग दिखाते हुए बिज़नेस प्लान या पिच डेक प्रोटोटाइप डिटेल्स या proof of concept डॉक्यूमेंटेशन फाइनैंशियल प्रोजेक्शन्स और फंड यूटिलाइज़ेशन प्लान बैंक अकाउंट डिटेल्स (कैन्सल्ड चेक या स्टेटमेंट) Frequently Asked Questions क्या इंडिविजुअल एंटरप्रेन्योर्स SISFS के लिए अप्लाई कर सकते हैं? नहीं। केवल DPIIT-रिकग्नाइज़्ड एंटिटीज़ — जो Private Limited Companies, LLPs, या Registered Partnerships के तौर पर इनकॉर्पोरेटेड हों — एलिजिबल हैं। सोल प्रोप्राइटर्स और इंडिविजुअल्स अप्लाई नहीं कर सकते। मैं कितने इन्क्यूबेटर्स को अप्लाई कर सकता हूँ? आप सिमल्टेनियसली 3 तक पार्टिसिपेटिंग इन्क्यूबेटर्स को अप्लाई कर सकते हैं। अगर एक से ज़्यादा आपको सिलेक्ट करते हैं, तो फंडिंग आपके सबसे हाई-प्रेफरेंस इन्क्यूबेटर से आती है जो आपको सिलेक्ट करता है। क्या DPIIT रिकग्निशन मैंडेटरी है? हाँ। आपका स्टार्टअप अप्लाई करने से पहले Startup India के तहत रिकग्नाइज़्ड होना चाहिए। आप startupindia.gov.in पर रिकग्निशन ले सकते हैं। क्या कोई ऐप्लिकेशन फीस है? नहीं। हर स्टेज पर ज़ीरो फीस — ऐप्लिकेशन, सिलेक्शन, डिस्बर्समेंट, और मॉनिटरिंग। इन्क्यूबेटर्स को ऐप्लिकेंट्स या बेनिफिशियरीज़ से कोई फीस चार्ज करने से प्रोहिबिटेड किया गया है। अगर मेरे स्टार्टअप को पहले से गवर्नमेंट फंडिंग मिल चुकी है तो क्या? आप एलिजिबल नहीं हैं अगर आपको किसी Central या State Government स्कीम से ₹10 लाख से ज़्यादा का मॉनेटरी सपोर्ट मिल चुका है। प्राइज़ मनी, सब्सिडाइज़्ड वर्कस्पेस, लैब ऐक्सेस, और मंथली फाउंडर अलाउएंसेज़ इस लिमिट से एक्सक्लूडेड हैं। सिलेक्शन कितना समय लेता है? ISMC ऐप्लिकेशन रिसीव करने के 45 दिनों के अंदर स्टार्टअप्स सिलेक्ट करती है। क्या मैं रिजेक्शन के बाद रीअप्लाई कर सकता हूँ? हाँ। आप रिजेक्शन की तारीख़ से 3 महीने बाद रीअप्लाई कर सकते हैं। फंड्स का इस्तेमाल किसके लिए नहीं किया जा सकता? सीड फंड्स का इस्तेमाल फिज़िकल फैसिलिटीज़ या इन्फ्रास्ट्रक्चर क्रिएट करने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्हें सख़्ती से एग्रीमेंट में स्टेटेड पर्पस के लिए इस्तेमाल करना होगा — R&D, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, ट्रायल्स, या मार्केट एंट्री। अगर स्टार्टअप फेल हो जाए तो क्या होता है? एंटरप्रेन्योर लर्निंग्स और फेल्योर के रीज़न्स कवर करते हुए एक रिपोर्ट सबमिट करता है — साथ में एक ऑडिटेड यूटिलाइज़ेशन सर्टिफिकेट। लोन्स अनसिक्योर्ड हैं, इसलिए इन्क्यूबेटर एग्रीमेंट टर्म्स से आगे कोई पर्सनल लायबिलिटी ऐप्लाई नहीं होती।