DIV Fund USAID के पूर्व डेवलपमेंट इनोवेशन वेंचर्स प्रोग्राम का इंडिपेंडेंट सक्सेसर है। इसे Sasha Gallant (CEO), Jeff Brown और Nobel लॉरिएट Michael Kremer चलाते हैं। Sasha Gallant USAID में DIV के पूर्व हेड रह चुके हैं। यह ग्लोबल डेवलपमेंट के लिए R&D इंजन की तरह काम करता है। एविडेंस-ड्रिवन इनोवेशन्स को बैक करता है। ये इनोवेशन्स लो- और मिडल-इनकम कंट्रीज़ में कॉस्ट-इफ़ेक्टिवली लाइव्स इम्प्रूव कर सकते हैं। India भी इस कैटेगरी में आता है।
फंडिंग तीन टियर्ड, माइलस्टोन-बेस्ड ग्रांट स्टेजेज़ में स्ट्रक्चर्ड है। Stage 1 Pilot ग्रांट्स USD 200K (लगभग ₹1.8 करोड़) तक के होते हैं। ये रियल-वर्ल्ड पायलट्स को सपोर्ट करते हैं। फ़ीज़िबिलिटी, यूज़र डिमांड और इम्पैक्ट पोटेंशियल टेस्ट करने के लिए हैं। Stage 2 Test & Position for Scale ग्रांट्स USD 500K तक के होते हैं। कभी-कभी USD 750K तक भी जाते हैं। ये रिगरस इम्पैक्ट इवैल्यूएशन्स या मार्केट वैलिडेशन फंड करते हैं। Stage 3 Scale ग्रांट्स USD 1.5M (लगभग ₹13.5 करोड़) तक के होते हैं। ये वैलिडेटेड इनोवेशन्स के स्केल-अप को ऐक्सेलरेट करते हैं। इनोवेशन्स के पास इम्पैक्ट और कॉस्ट-इफ़ेक्टिवनेस का प्रूफ़ होना चाहिए।
कैपिटल के अलावा फंड ग्रांटीज़ को रिगरस इवैल्यूएशन एक्सपर्टीज़ देता है। रिसर्चर्स, इवैल्यूएटर्स और स्केलिंग पार्टनर्स के ग्लोबल नेटवर्क से जोड़ता है। सभी ग्रांट्स नॉन-डाइल्यूटिव हैं। फंड इक्विटी नहीं लेता। डेट या दूसरे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स भी नहीं देता। फंडिंग माइलस्टोन्स से जुड़ी होती है। प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन, डेटा कलेक्शन, इवैल्यूएशन और की पर्सोनेल पर फ्लेक्सिबली इस्तेमाल हो सकती है।
ऐप्लिकेशन्स साल भर रोलिंग बेसिस पर ऐक्सेप्ट होती हैं। कोई फिक्स्ड डेडलाइन नहीं है। इंडियन स्टार्टअप्स, सोशल एंटरप्राइज़ेज़, नॉनप्रॉफिट्स और रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन्स एलिजिबल हैं। उन्हें पॉवर्टी में रह रहे लोगों के लिए सॉल्यूशन्स पर काम करना चाहिए। हेल्थ, ऐग्रीकल्चर, एजुकेशन और फाइनेंशियल इन्क्लूज़न के एरियाज़ कवर हैं। एनर्जी और क्लाइमेट अडैप्टेशन भी शामिल हैं। ऐप्लिकेंट्स को Stage 1 से शुरू करने की ज़रूरत नहीं है। इनोवेशन की मैच्योरिटी के हिसाब से डायरेक्ट स्टेज पर अप्लाई कर सकते हैं।